श्री कन्या साक्षात भगवती का हीं स्वरूप हैं। उन्हें आद्या भगवती का स्वरूप मानकर पूजना सनातन धर्म की परंपरा है। मातृ शक्ति का राष्ट्रीय अभ्युदय में अमूल्य योगदान है। मातृ शक्ति और मातृ महिमा की श्रेष्ठता को शीश झुकाकर नमन करने हेतु आयोजित इस कार्यक्रम की परिणति सामाजिक सद्भाव के रूप में होगी।
जनमानस में भी नारी शक्ति के प्रति आस्था बलवती होगी।
यह कार्यक्रम नारी सशक्तिकरण के लिए एक गहरी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नींव प्रदान करती है। कन्या पूजन, मातृ शक्ति को जन्मजात रूप से पूजनीय का संदेश देता है।
सर्व समाज की कन्याओं को आद्या भगवती का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करना, छुआ-छुत पर आखिरी प्रहार है।
यह कार्यक्रम मातृ शक्ति के जागरण को राष्ट्रीय अभ्युदय (राष्ट्र के उत्थान) से जोड़ता है। इसका अर्थ है कि मातृ शक्ति का सशक्तिकरण सिर्फ उनका व्यक्तिगत उत्थान नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। यह समाज में मातृ शक्ति के प्रति सेवा भाव, विनम्रता, और आध्यात्मिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करता है, जो एक स्वस्थ और नैतिक समाज की नींव है।

