आत्म उत्थान और कर्तव्यबोध के निमित कलिकाल में तपोमूर्ति भक्तराज भगवान श्री हनुमान जी महाराज की अर्चना वंदना अत्यावश्यक है।
भगवान श्री हनुमान जी का चरित्र अदम्य साहस, विनम्रता, सेवाभाव और भक्ति की साक्षात व्याख्या है। ज्ञान-भक्ति और वैराग्य का पावन संगम है उनका चरित्र।
ऐसे में निःस्वार्थ सेवा-सद्भावना और राष्ट्रीय उत्थान के निमित उनकी अर्चना-बंदना अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ हीं अपने लक्ष्य की ओर अडिग भाव से बढ़ते रहने के लिए उनका आशीर्वाद भी जरूरी है।
अतएव राष्ट्रीय अभ्युदय मंच (RAM) की प्रथम गतिविधि के रूप में श्री हनुमान चालीसा जी का सामूहिक पाठ सुनिश्चित किया गया है।
यह सामूहिक पाठ न केवल आध्यात्मिक अर्थों में शुभद है अपितु सांस्कृतिक, सामाजिक मानस के निर्माण में भी इसकी महती भूमिका सिद्ध होगी।
यह सामूहिक पाठ कुछ इस प्रकार से संपन्न किया जाए:
सेवा बस्तियों, गाँव, टोला और सार्वजनिक स्थलों पर ये गतिविधियां समूह में संपन्न होगी।
जिनका क्रम निम्नवत है:-
- सभी उपस्थित सदस्यों द्वारा श्री हनुमान चालीसा जी का सस्वर पाठ किया जाएगा।
- पाठ के उपरांत श्री हनुमान जी के गुणों पर चर्चा। चरित्र निर्माण, सद्भावना संदेश पर विचार-विमर्श और परिचर्चा।
- श्री हनुमान जी महाराज की आरती के पश्चात कार्यक्रम का आध्यात्मिक समापन।
इस सामाजिक आध्यात्मिक आयोजन से हमें प्राप्त लाभ/संदेश निम्न हैं:
- श्री हनुमान चालीसा जी की सिद्धि असंदिग्ध है। इस चालीसा के महत्व के साक्षी साक्षात भगवान शंकर हैं। इसके पाठ मात्र से अपूर्व शक्ति और सात्विकता का संस्पर्श मिलता है। व्यक्ति में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है।
- समाज में इस सामूहिक पाठ से एकता, सहयोग और सेवा भाव का प्रसार होता है। सस्वर पाठ एक लय में अनेक लोगों को गूँथ देने का सूक्ष्म आध्यात्मिक प्रक्रिया है। इसका प्रभाव हमारे मस्तिष्क पर पड़ता है।
- सेवा, समर्पण और सत्यनिष्ठा के मूल्यों का प्रचार होता है। यह समाज में नैतिकता और मर्यादा को स्थापित करता है, जिससे सामाजिक विघटन कम होता है।
- अदम्य साहस, निस्वार्थ सेवा, विनम्रता जैसे नैतिक गुण विकसित होते हैं साथ हीं आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
- राष्ट्र के लिए कर्तव्यबोध के विकास और राष्ट्रीय चेतना के जागरण में इस पाठ की महत् भूमिका सुनिश्चित होगी।

