सेवा एवं संस्कार

मेरा गाँव-मेरा तीर्थ

अपने गाँव के मंदिर को तीर्थ स्वरूप मानकर उसकी स्वच्छता, संरक्षण और सजीव परंपरा को पुनर्जीवित करने का सामूहिक प्रयास।

कार्यक्रम का परिचय

  1. हर गाँव में प्रमुख मंदिरों को तीर्थ मानकर, महीने में कम से कम एक बार हर परिवार को दर्शन-पूजन के लिए प्रेरित करना।
  2. ⁠गाँव को तीर्थ समझकर उसकी स्वच्छता और समस्या को अपनी समस्या समझना।

"गाँव का मंदिर केवल आस्था का स्थान नहीं, बल्कि गाँव की एकता, संस्कृति और सेवा-भाव का प्रेरणास्रोत है।"

समाज के लिए संदेश

उद्देश्य

ग्राम मंदिरों का संरक्षण, स्वच्छता, धार्मिक परंपराओं का संवर्धन और सामाजिक एकता।

सहभागिता

सभी ग्रामवासियों के लिए – परिवार, युवा, महिला एवं वरिष्ठ नागरिक।

आयोजन स्थान

ग्राम का मंदिर, मंदिर परिसर एवं आसपास का क्षेत्र। (ग्राम, प्रखंड, जिला स्तर)

समुदाय पर प्रभाव

स्वच्छ वातावरण, सशक्त सामाजिक जुड़ाव, सांस्कृतिक चेतना और ग्राम विकास को प्रेरणा।

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