हमारे बारे में

हमारा ध्येय

“सर्वभूत हिते रताः”—अर्थात् समस्त प्राणियों के कल्याण में लीन रहना—हमारी भारतीय सभ्यता की पहचान और सर्वोच्च मूल्य है। हमारी संस्कृति में स्वयं को मिटाकर दूसरों के उत्थान और हित की कामना करना ही जीवन का सार माना गया है। इसी महान ध्येय को आत्मसात करते हुए ‘राष्ट्रीय अभ्युदय मंच (RAM)’ की स्थापना की गई है।

वर्तमान परिदृश्य और हमारी आवश्यकता

आज सरकार के अथक प्रयासों और करोड़ों रुपये के व्यय के बावजूद, समाज में नशा, व्यभिचार, भ्रष्टाचार, घृणा और हिंसा जैसी विकृतियाँ दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। अवसाद (डिप्रेशन) एक महामारी का रूप ले चुका है। चाहे आतंकवाद हो, महिलाओं पर अत्याचार हो या अन्य अपराध—इन सबका मूल कारण व्यक्ति के भीतर करुणा, नैतिकता और विवेक का शून्य हो जाना है।

हमारा संकल्प और कार्यशैली

राष्ट्रीय अभ्युदय मंच (RAM) इसी सामाजिक और नैतिक पतन को रोकने के लिए संकल्पित है।

यहाँ जन-सामान्य की आध्यात्मिक, सामाजिक और वैयक्तिक उन्नति के लिए समर्पित सेवा-सदस्यों का एक पुंज क्रियाशील है। हम सामाजिक संवाद और सेवा के उद्देश्य से रचनात्मक व आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।

  • सरलता: हमारे आयोजन लघु स्तर पर और जन-सुलभ संसाधनों में संपन्न होते हैं।
  • लक्ष्य: मनुष्य की सामाजिक रचनात्मकता और सामूहिक आध्यात्मिकता का विकास करना।
  • निर्माण: राष्ट्रीय अभ्युदय मंच, कर्मशील व्यक्तित्व, प्रगतिशील समाज और धर्मशील राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।

परिवर्तन का मूल: धर्म और विवेक

व्यक्ति और समाज निर्माण के लिए संगठित प्रयास ही समय की मांग है। जब व्यक्ति ‘धर्मशील’ होता है, तभी उसके भीतर ‘विवेक’ जागृत होता है। एक विवेकशील व्यक्ति ही अच्छे और बुरे में धर्मयुक्त भेद समझ सकता है। अंततः, यही विवेकपूर्ण निर्णय हमारे और समाज के उत्थान का कारण बनता है।

आह्वान

आइए, इस राष्ट्रीय अभ्युदय मंच(RAM) के माध्यम से जन-सामान्य के चतुर्दिक उत्थान के निस्वार्थ प्रयोजन को सफल बनाएँ। इसे आप मानवता कहें, धर्म कहें या कर्तव्य—आज इसकी सर्वाधिक आवश्यकता है। अपने जीवन के कुछ क्षणों को समाज हित में खपाकर सार्थक करें।

राष्ट्रीय अभ्युदय मंच(RAM) के साथ जुड़े

Scroll to Top