सेवा एवं संस्कार
ग्राम अभ्युदय
समृद्ध, स्वावलंबी और संस्कारित ग्राम के निर्माण के लिए एक सामूहिक प्रयास
- निरंतर अभियान
- सभी के लिए खुला
- ग्राम, समुदाय स्तर
कार्यक्रम का परिचय
भारतीय सांस्कृतिक जन-जीवन का मेरुदंड ग्राम्य जीवन है। भारत में नगर सभ्यता आधुनिकीकरण और समावेशी प्रक्रिया के तहत फलते फुलते रही। फलत: नागरिक जीवन वैश्वीकरण की होड़ में आ पड़ा और
वहां से भारतीयता के तत्व क्षीण होने लगे। परतंत्र भारत में उपनिवेश का सारा जोड़ इन्हीं नगरों पर था जबकि नगरों से दूर, बाहरी हस्तक्षेप से बचा हुआ शांत ग्राम जीवन अपने सांस्कृतिक देशी मूल प्रवाह में अक्षुण्ण बना रहा।
यहां का ग्राम जीवन अपने मौलिक स्वरूप में अविस्थत होकर भारतीय अर्थव्यवस्था को संभाले रहा। कृषि संस्कृति इसी व्यवस्था के कारण जीवित रह सकी। यह ग्राम जीवन, भारतीय आचरण और मूल्यों का प्रतीक है।यह भारी विडंबना है कि आधुनिक भारत में बड़ी भारी उपेक्षा के कारण हमारा ग्राम्य जीवन ही त्रस्त हो पड़ा। आज ग्राम्यजीवन के समक्ष बड़ी चुनौतियाँ हैं! ये चुनौतियाँ जन जीवन की हीं नहीं
वरन राष्ट्र नव निर्माण की भी चुनौतियाँ हैं। अभ्युदय मंच इस ग्राम अभ्युदय के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा लक्ष्य ग्रामीण जन जीवन को सुचारू,सबल और स्वस्थ्य बनाने का है।इस ध्येय को सफल बनाने के लिए हम संकल्पबद्ध हैं।
हमारे अष्टसंकल्प निम्नवत हैं:-
रोग-मुक्त गाँव
ग्राम्य जीवन की सबसे बड़ी चुनौती है - रोगमुक्त जीवन। स्वास्थ्य संबंधी अपेक्षित जानकारी के अभाव और जरुरी स्वास्थ्य ढ़ांचे की कमी के कारण हमारा ग्राम्य समाज दिनों दिन बीमार होते जा रहा है। जबकि प्रचुर संसाधन और उपचार के देशी तरीक़े सहज ही उपलब्ध हैं। ऐसे में हमने प्रण लिया है कि ग्राम्य अभ्युदय के दौरान, प्रत्येक कार्यक्रम में किसी एक घातक रोग पर केंद्रित होकर हम सभी आयोजन करेंगे, जिसमें उक्त रोग के उपचार और बचाव के तरीकों पर चर्चा परिचर्चा की जाएगी।
स्वच्छ गाँव
स्वच्छ समाज में स्वच्छ मस्तिष्क बसता है। ग्राम्य जीवन प्राकृतिक सौंदर्य से भरा-पूरा होने के बावजूद मानवजन्य अपेक्षा का शिकार है। फलत: कचरा,धूल धुएं से उठने वाला प्रदूषण और संक्रमण से होने वाले रोग फैल रहे हैं। ऐसे में स्वच्छता को लेकर जागरण बेहद जरूरी और प्राथमिक है। हम सभी प्रत्येक कार्यशाला में अपने सेवा सदस्यों के साथ ग्राम्य स्वच्छता में सहयोग करेंगे जिससे स्वच्छता को लेकर जागरूकता का विस्तार हो सके।
योगयुक्त गाँव
रोग का सबसे बड़ा और सफल प्रतिरोध योग है।यह परंपरा, धर्म और विज्ञान का संगम है जो व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त और सबल बनाता है। हम गांव-गांव में योग की सरल और सहज शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध हैं।
स्वदेशी उत्पाद
ग्रामीण कुटीर उद्योगों की क्रांतिकारी भूमिका से ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिल गयी थी।आज वैश्विक पटल पर राष्ट्र अभ्युदय के लिए यह आवश्यक है कि ग्राम्य स्तर पर स्वचालित छोटे उद्योग धंधों का क्रियान्वयन हो। इससे गांव समाज का आर्थिक जीवन तो उन्नत होगा ही, दूसरी तरफ़ राष्ट्र भी अधिक स्वदेशी बनकर उभरेगा। वहीं रोजगार और जीविका के विविध मार्ग प्रशस्त हो जाएंगे। अत एव प्रत्येक गांव समाज की क्षेत्र विशेष में अभिक्षमता और कौशल को देखते हुए सम्बद्ध लघु उद्योगतंत्र को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने और सहयोग करने की योजना से, राष्ट्रीय अभ्युदय मंच क्रियाशील होगा।
पर्यावरण
पर्यावरण ही यह तय करता है कि जन जीवन का आध्यात्मिक-सामाजिक स्वरूप क्या होगा! नदी,पहाड़,नहर- तालाब, बाग़ बगीचों से घिरे सुंदर गांव हमारी सभ्यता के प्रतीक थे। आज इस पर्यावरण का अभाव दिखता है। हम पुनः ऐसे पर्यावरण को प्रतिष्ठित करने और संवर्धित करने के लिए वृक्षारोपण, बाग बगीचे की सफाई, पेड़ पौधों का सरंक्षण, धूल और धुंध से रहित वातावरण के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।
सेवा-सदस्य
गाँव में सेवा सदस्यों की सकारात्मक भूमिका से समाज में एकजुटता के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द भी मजबूत होगा।
वृक्षारोपण
वृक्षारोपण का महत्व असंदिग्ध है। वृक्ष ही प्रदूषण के वैश्विक महा संकट से हमें बचा सकते हैं। गांवों में वृक्षों की दैव प्रतिष्ठा होती थी। लेकिन इधर यह प्रवृत्ति कम हुई है। शहरों की देखा देखी, गांवों में भी वृक्षों की अंधाधुंध कटाई चल रही है जिससे पर्यावरणीय संकट उत्पन्न ही होते जा रहे हैं। प्रत्येक कार्यक्रम में गांव समाज के साथ वृक्षारोपण का हमारा संकल्प , ग्राम अभ्युदय में प्राण फूंकने वाला साबित होगा।
जल संरक्षण
जल ही जीवन है। आधुनिक विश्व की सबसे बड़ी चुनौती स्वच्छ जल की उपलब्धता है। सौभाग्य से भारतवर्ष को नदियों का आशीर्वाद प्राप्त है। स्वच्छ जल के विविध स्रोत यहां फलते फूलते रहे। लेकिन शिक्षा और जानकारी के अभाव ने हमें जल सरंक्षण और जल स्वच्छता के प्रति उदासीन कर दिया। फलत: धीरे धीरे बड़ी बड़ी नदियाँ ,तालाब, कुएं पोखर- सब के सब प्रदूषण के गाल में समाए जा रहे हैं।इस भयंकर त्रासदी को रोकने के लिए अभ्युदय मंच ने प्रण लिया है कि जल सरंक्षण और जल स्वच्छता को लेकर गांव गांव में जागरूकता फैलाई जाए। गाँव का प्रत्येक व्यक्ति जल संकट को समझें और इसके सरंक्षण और संवर्धन में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
“हमारा लक्ष्य है – समृद्ध ग्राम, संस्कारित समाज और सशक्त भारत का निर्माण।”
कार्यक्रम एक नज़र में
उद्देश्य
गाँवों को संस्कारित, समृद्ध, स्वावलंबी और सशक्त बनाना
लाभार्थी
ग्रामवासी – बच्चे, युवा, महिलाएँ, किसान, स्वयं सहायता समूह
आयोजन स्थान
ग्राम, ग्राम पंचायत, ब्लॉक और ग्रामीण क्षेत्र
समुदाय पर प्रभाव
शिक्षित, स्वस्थ, स्वावलंबी, संगठित और संस्कारित ग्राम समाज का निर्माण
